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काशी धाम

काशी धाम में आपको एक साथ सभी बारह शिवलिंग के दर्शन हो जायेंगे के दर्शन हो जाएंगे। काशी धाम में प्रवेश करते ही प्राचीन लालेश्वर महादेव के मंदिर के चारों तरफ भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों की मनोहर झांकी को बेहतरीन तरीके से प्रस्तुत किया गया है। जो देखने में काफी मनमोहक लगता है ।

काशी धाम के मुख्य द्वार पर लगा अनोखा दरवाजा खुद इसकी विशेषता बता रहा है 3:5 बाई 6 फीट लंबाई चौड़ाई और दो पल्लो वाले इस दरवाजे में 28 खाने बने हैं सभी खाने में धर्म संस्कृति के दुर्लभ चिन्ह बने हुए हैं इसमें स्वास्तिक , ओम , सर्प शिवलिंग ,सिम्हा , श्रृंगी ,कमल ,षटकोण ,नंदी ,केकड़ा , पताका ,दीपक ,नगाड़ा और वरद मुद्रा का चिन्ह लगाया गया है

हमारी धरोहर

हमारी विरासत

  • किसे कहते है काशी ?
  • कैसे हुई काशी की रचना ?
  • क्या है काशी का वास्तविक मतलब ?
जानने के लिए एक बार जरूर आईये काशी धाम

काशी धाम

काशी धाम विश्व प्रसिद्ध काशी नगरी की सांस्कृतिक विरासत का एक अनोखा संग्रहालय है। हम देख सकते है अपनी ऐतिहासिक व धार्मिक विरासत की अद्भुत झांकी।

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लालेश्वर महादेव

श्री लालेश्वर महादेव का यह मंदिर परिसर अद्वितीय है। भारतीय संस्कृति व् सभ्यता सहित सनातन धर्म के विभिन्न पहलुओं का अनुपम संग्रह इस परिसर की विशेषता है। इस विरासत को देवपुरुष संजीव जनार्दन किणी की पुण्य स्मृति में रचा गया है। शांति , सौंदर्य एवं दिव्यता के इस आध्यात्मिक व् ऐतिहासिक परिसर में आपका हार्दिक स्वागत है।

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धरोहर संग्रह

विश्व की सांस्कृतिक राजधानी काशी में माँ गंगा के पावन तट पर नवनिर्मित 'कशी धाम ' एक अभिनव संस्कृति - तीर्थ है। वाराणसी में गंगा तट पर राजस्थान के बूंदी राज्य के राजा सूरज भान सिंह हाड़ा द्वारा बनवाये गये प्रथम पक्का घाट 'बूंदी परकोटा घाट ' के ऊपर स्थपित किये गये

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उद्घाटन समारोह


विश्व के सबसे प्राचीन धर्म, संस्कृति व विरासत का सरल,सहज,सम्यक और सारगर्भित दर्शन कराने वाला आद्वितीय संग्रहालय "काशीधाम" जनमानस के अवलोकनार्थ खोल दिया गया है। वाराणसी में गंगा तट के बूंदी परकोटा घाट के ऊपर ब्रह्मा घाट के समीप स्थित इस अनूठे संग्रहालय का भव्य उद्घाटन जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रमुख शिष्य और शंकराचार्य प्रतिनिधि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी,बनारस की राजकुमारी कृष्ण प्रिया जी, स्वच्छता की ब्रांड अंबेस्डर अंतरराष्ट्रीय एथलीट नीलू मिश्रा और काशी धाम की आधारशिला रखने वाले मुंबई हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश किनी और उनकी धर्मपत्नी राधिका किनी के करकमलों से रामनवमी के पावन दिवस दिनांक 13- अप्रैल -2019 को हुआ |



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काशीधाम पर आमो - ओ - ख़ास के विचार

जयेश किणी , उनकी धर्मपत्नी राधिका किणी और सहयोगियों ने जिस तरह से काशीधाम को संवारा है वह अभिनंदनीय है| जिस तरह से आज विकास के नाम पर काशी में मंदिरों ,मठों, मूर्तियों और धरोहरों को तोड़ा जा रहा है वह निंदनीय है पर काशी धाम में आने के बाद यह सुकून मिला की कोई तोड़ने वाला है तो कोई यहां बनाने वाला भी है |
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
यह अद्भुत संग्रहालय है यह म्यूजियम हमारी पीढ़ियों को हमारे धर्म और संस्कृति में प्रवेश कराने का पुनीत कार्य करेगी धर्म संस्कृति और विरासत को सहेजने सामान्य के लिए जयेश जी को बहुत-बहुत धन्यवाद |
राजकुमारी कृष्णा प्रिया , अध्यक्ष , विश्व संस्कृत प्रतिष्ठानम

अजीत सिंह, पार्षद, राजमंदिर देवपुरूष संजीव जनार्दन किणी एवं मां वैजयंती के सुपुत्र जयेश किणी ने केवल हमारी अनमोल विरासत को संजोने का काम किया है, बल्कि एक नया इतिहास लिख दिया है। उन्होंने वाराणसी आकर इस ऐतिहासिक कार्य के लिए राजमंदिर के इस ऐतिहासिक स्थल का चुनाव किया, जो पर्यटकों के आकर्षण का एक बड़ा केन्द्र बनेगा। अब राजमंदिर देशभर में पर्यटन के मानचित्र पर अंकित होगा। जिसके माध्यम से हमारे पूरे क्षेत्र का ऐतिहासिक विकास होना तय है।
अजीत सिंह, पार्षद, राजमंदिर

मदनलाल यादव, चित्रकार मैंने काशी में कई और संग्रहालयों में काम किया है। काशी में शायद ही कोई ऐसा संग्रहालय है, जिसमें धर्म और संस्कृति की समग्रता संचित हो। ऐसे में यह बनारस का एक अनूठा और अद्भुत संग्रहालय है। जहां आपकोे एक नये दृश्य और ‘दर्शन’ के दर्शन होंगे।
मदनलाल यादव, चित्रकार