परिचय

विश्व की सांस्कृतिक राजधानी काशी में माँ गंगा के पावन तट पर नवनिर्मित 'काशी धाम ' एक अभिनव संस्कृति - तीर्थ है।




काशी धाम

काशी के पहले पक्के घाट बूंदी परकोटा घाट के ऊपर ब्रह्मा घाट के समीप काशीधाम के नाम से एक अनूठा संग्रहालय बनाया गया है| सनातनी संस्कृति को एक संग्रहालय रूपी सिधोरे में सहेजने का काम किया है मुंबई उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश किणी ने | जिसमें जिसमें एक छत के नीचे हिंदू धर्म के समस्त शास्त्रों सभ्यताओं संस्कृतियों और विरासत को सहेजने और संचित करने का सार्थक कार्य किया गया है यह काशी का अनूठा और अद्भुत संग्रहालय है | जहां प्रवेश के बाद आप अपनी धरती को भूल जाएंगे, यहां आकर आप महसूस करेंगे कि आप स्वर्ग की धरा पर पैर रख चुके हैं, सत्य, धर्म, न्याय और आदर्श के अतिरिक्त जीवन में सब कुछ व्यर्थ है| सनातन धर्म की खूबसूरत पाठशाला में अध्यात्म व काशी के संगम के बीच शांति और सौंदर्य की दिव्यता में आप डूब जाएंगे | ऐसे पवित्र और धर्म दर्शन संघ धर्म प्रेरक ऐतिहासिक स्थल का नाम काशीधाम |


मुंबई उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता जयेश किणी आज से 10 वर्ष पूर्व अपने पिता की अस्थियो को गंगा में प्रवाहित करने काशी आए थे | मानिये जैसे यहां आने के बाद उनके पिता ने उनसे कहा कि पुत्र इस स्थान पर ऐसा संग्रहालय होना चाहिए जिसमें हमारे धर्म संस्कृति की विरासत संचित हो | बस फिर क्या था जयेश किणी ने काशी में ऐसा संग्रहालय बनाने का संकल्प ले लिया | सन 2015 में जगह मिली और जयेश अपनी निजी सहयोगियों संग पिता के सपने और अपने संकल्प को साकार रूप देने में जुट गए | 4 साल की कड़ी मेहनत और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने काशी ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक अनोखा और अद्भुत संग्रहालय का निर्माण करा दिया है | जो हमारी आने वाली पीढ़ियों का पथ प्रदर्शन करने के साथ पावन विरासत की झलक दिखाने वाला होगा |


लगभग 400 वर्ष पूर्व अकबर से संधि के उपरांत राजस्थान बूंदी इस्टेट के महाराजा सूरजभान सिंह काशी आए थे | काशी नगरी में भागीरथी के पावन पावन तट पर सूरज भान सिंह हाड़ा ने सर्वप्रथम यही अपना बूंदी महल और पक्का घाट बनवाने के साथ श्री लालेश्वर महादेव का मंदिर स्थापित कराया था | उन्होंने बूंदी परकोटा घाट पर भगवान लालेश्वर महादेव का भव्य मंदिर बनवाया था | इसी मंदिर परिक्षेत्र में काशीधाम संग्रहालय बना है| बूंदी परकोटा घाट पर स्थित 400 वर्ष पुराना है और पौराणिक लालेश्वर महादेव मंदिर अब एक नए कलेवर में दिख रहा है | मंदिर की साज-सज्जा और रंगराजन सहज ही आकर्षित करती है| बूंदी स्टेट के महाराजा सूरज भान सिंह ने इस मंदिर को आज से 400 साल पहले बनवाया था|


काशी धाम के मुख्य द्वार पर लगा अनोखा दरवाजा खुद इसकी विशेषता बता रहा है 3:5 बाई 6 फीट लंबाई चौड़ाई और दो पल्लो वाले इस दरवाजे में 28 खाने बने हैं| सभी खाने में धर्म संस्कृति के दुर्लभ चिन्ह बने हुए हैं ! इसमें स्वास्तिक ,ओम, सर्प ,शिवलिंग, सिम्हा ,श्रृंगी ,कमल ,षटकोण, नंदी, केकड़ा, पताका , दीपक ,नगाड़ा और वरद मुद्रा का चिन्ह लगाया गया है |


काशी धाम में आपको एक साथ बारहो शिवलिंग के दर्शन हो जाएंगे | काशी धाम में प्रवेश करते ही लालेश्वर महादेव के मंदिर के चारों तरफ भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की मनोहर झांकी सजाई गई है जो देखने में काफी मनमोहक है|


काशी धाम संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर ही ही भगवान नटराज की भव्य मूर्ति लगाई गई है | उसके चारों और नृत्य की विभिन्न मुद्राओं में भगवान नटराज का नया और सुन्दर अंदाज मन को मोह लेने वाला है। इसके बगल में दंडपाणी का शिव चित्र है जो शेषनाग की डोरी में छल से लोगो का वध करने वाले वामन,नरसिंह , वाराह और कश्यप को बांधे हुए हैं |यहाँ यह दिखाया गया है कि दंडवाणी शिव के दंड से भगवान भी नहीं बच सकते हैं इनके पास हिंदू धर्म में सबसे ज्यादा पूजित गंगा ,गीता और गायत्री को दर्शाया गया है


म्यूजियम के भूतल पर गंगा उद्गम से लेकर समागम तक की अद्भुत झांकी बनाई गई है | भगवान विष्णु के चरणों से निकलने के बाद गंगा का शिव की जटाओं में आना फिर भागीरथी के साथ गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज और वाराणसी और फिर गंगा सागर में मिल जाने कि संजीव झांकी यहां आपको देखने को मिल जाएगी |


काशी धाम में अखंड भारत का प्राचीन मानचित्र बनाया गया है | जिसके उत्तर में अफगानिस्तान, पश्चिम में मोहनजोदङो , दक्षिण में पांड्या चोल और पूर्व में अरुणाचल प्रदेश है | इसके अलावा इस मानचित्र में देश के मुख्य जगहों के प्रमुख मंदिरों और विरासत को उभारा गया है इसमें प्राचीन समय की पुरियो को दर्शाया गया है


हिंदू धर्म की प्रमुख व्रत त्याहारों और देश के राज्यों के लोकनृत्यों का सजीवता प्रदर्शित करते हुए चित्र यहां आपको देखने को मिलेंगे । नाग पूजा , छठ, दीपावली ,विवाह ,होली ,विजयदशमी ,आदि त्योहारों के साथ भांगड़ा रक्षाबंधन, कथकली, झूमर ,मणिपुरी ,डांडिया आदि लोकनृत्यों की भी मनमोहक पेंटिंग बनाई गई है |


काशी धाम में देवताओं और राक्षसों द्वारा समुद्र मंथन की सचिव झांकी बनाई गई है | इसके साथ ही भस्मासुर और शिव जी का तपस्या करना, वरदान फिर मां पार्वती को देखकर मोहित होना , शिव को भस्म करने के लिए दौड़ाने और भगवान विष्णु को मोहिनी के रूप में नृत्य करा कर भस्म करने की कहानी यहां चित्रित की गई है |हिंदू धर्म में देवताओं की मनौती करने और उनके धाम में दंडवत करते हुए जाने का क्रमवार चित्र यहां प्रस्तुत किया गया है


काशी धाम काशी का ही नहीं बल्कि भारत का ऐसा अनूठा म्यूजियम है जहां देवताओं के सभी वाहन, पुष्प और आयुध का चित्र उकेरा गया है | देवताओं में चूहा,मयूर , गरूण ,उलूक , अग्नेय ,अश्व, नदी ,सिंह और मगरमच्छ का सजीव चित्र के साथ देवताओं के पसंदीदा पुष्प, कनैल ,धूप, चंपा , अडोल ,परिजात ,चमेली, तुलसी और कमल का चित्र उकेरी गई है | देवताओं के अस्त्र-शस्त्र में परसा ,माला, मृदुल ,तलवार , खड्ग , ब्रज ,चक्र, पॉश धनुष त्रिशूल और गदा की झांकी भी दिखाई गई |


म्यूजियम में सबसे आकर्षित झांकी खगोल विज्ञान की है इसमें 27 नक्षत्र ,8 वशुओ,12 राशियों, नौ ग्रहों, सप्त ऋषि ,10 दिशाओं ,ध्रुव ,इंद्र , कुबेर, के चित्रों के साथ मनुष्य के गर्भावस्था से मृत्यु तक इनके पड़ने वाले प्रभाव बेहद ही सजीवता के साथ दर्शया किया गया है |


काशी धाम में आपको योगेश्वर महाराज भगवान कृष्ण की अति दुर्लभ जन्म कुंडली देखने को मिली जाएगी |इसके साथ सप्त ऋषि ,दशावतार ,अष्टलक्ष्मी ,पंचकन्या ,चार धाम, तीन ऋण ,चार आश्रम, आसन, षट्चक्र के चित्रों की पूरी जीवन झांकी देखने को मिलेगी |


भगवान राम ने रावण से युद्ध के दौरान विभीषण से जो मानस रथ का वर्णन किया था व काशी धाम में संजीव रूप से देखा जा सकता है | इसके अलावा यहां हनुमान जी का भी एक अदभुत चित्र बनाया गया है | जिसमें हनुमान जी अपने अपने बाएं हाथ में चन्द्रमा और दाएं हाथ में सूर्य को लेकर उन्हें उल्टा रखा है, यानी इसमें दर्शाया गया है कि हनुमान जी का स्वास्थ्य पर पूरा नियंत्रण था इसके साथ ही एक व्यक्ति हनुमान जी को अपशब्द कह रहा है तो दूसरा उन्हें माला पहनाने आ रहा है हनुमान जी दोनों को एक समान ही देखते हैं म्यूजियम को आकार देने वाले मदन लाल यादव ने बताया कि जो मान और अपमान को सम कर लिया वही हनुमान है और यहां हनुमान जी के स्वरूप को चित्रित किया गया है !


काशीधाम के वास्तु चित्र का बड़ा चित्र बनाया गया है इसके साथ माह के दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के एक के दिन एक काल को पूरी वास्तविकता के साथ प्रदर्शित किया गया है 10 दिशाओं में देवताओं का चित्र बनाया गया है चार युगों में अनु की झांकी यहां देखने को मिलेगी सतयुग में मनुष्य का मन हाथी के समान बलवान था सीता युग में उसका मन घोड़े के समान तो आप हमें मन की ताकत घोड़े के समान और कलयुग में मन की ताकत चींटी के समान हो गई है फिर भी मनुष्य उस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है


काशीधाम के वास्तु चित्र का बड़ा चित्र बनाया गया है इसके साथ मां के दोनों पक्षों कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में चंद्रमा के एक चंद्रमा के एक के दिन एक काल को पूरी वास्तविकता के साथ प्रदर्शित किया गया है 10 दिशाओं में देवताओं का चित्र बनाया गया है चार युगों में अनु की झांकी यहां देखने को मिलेगी सतयुग में मनुष्य का मन हाथी के समान बलवान था सीता युग में उसका मन घोड़े के समान तो आप हमें मन की ताकत घोड़े के समान और कलयुग में मन की ताकत चींटी के समान हो गई है फिर भी मनुष्य उस पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा है


कठोपनिषद में वर्णित सुप्रसिद्ध नचिकेता की कथा को इस म्यूजियम में कई चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है नचिकेता को यमराज द्वारा मनुष्य के मुक्ति का मूल बताना | श्वेदज उद्भव अखंड विंडो की पूरी कहानी दर्शाई गई है नचिकेता को यमराज द्वारा इसके सतह ही म्यूजियम के ऊपरी तल पर हरीश चंद्र की पूरी कहानी २३ चित्रों के माध्यम से चित्रित की गयी है |


राजगुरु का निवास बना कारावास

यह संयोग ही कहा जाएगा कि आजादी की लड़ाई के दौरान क्रांतिकारी राजगुरु कई महीनों तक जिस लालेश्वर मंदिर के भवन में रहे थे , म्यूजियम में उसी कमरे में कारावास की झांकी बनाई गई है कारावास में एक चार पाई है जहां भगत सिंह बैठे हुए हैं भगत सिंह राज देव और सुखदेव इंकलाब जिंदाबाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद नारे लगाते समय जीवन की प्रतिमा लगाई गई है कारावास की जीवंत झांकी का दृश्य देखने के बाद वाकई आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे


काशीधाम एक नजर में

  1. 2015 में काशी धाम के लिए किया गया जमीन का चुनाव
  2. 2016 से शुरू हुआ काशी धाम का निर्माण कार्य
  3. 3000 वर्ग फीट के करीब दायरे में बना है यह संग्रहालय
  4. 80 वर्ष के कलाकार मदन लाल यादव ने साकार की काशी धाम की कल्पना
  5. 400 साल पुराना है लालेश्वर महादेव का मंदिर
  6. 28 खाने का बना है म्यूजियम का मुख्य दरवाजा